मैथिली अपन टंगघिच्चा प्रवृतिक लेल सोंसे मिथिला मे मशहुर अछि । लोग
एतय कंस्ट्रक्टविक कम आ डिस्ट्रकटिव बेसी अछि । एहि सबकए रहिते जे सार्थक
काज होएत अछि ओहि मे जीवटता आ लगनशीलता क जरूरत होएत अछि । मैथिली मे एहन
काज कम्मे होइत आएल अछि । एहि कड़ी मे बालमुकुन्द पाठक आ हुनकर टीम सैप्पी
मार्ट आनलक जे मैथिली आ मिथिला क लेल एकटा मीलक पाथर साबित होएत । अपन
ऑनलाइन पोर्टल सैप्पी मार्ट स दुनिया क हरेक कोन मे बसल
मैथिल लेल मिथिलाक पोथी, तीमन, पेटींग आ आन आन चीज सब बेचि रहल अछि ।
चारि टा लोक कए क खेल-खेल मे बनल ई परियोजना आय विस्तृत रूप लए लेने अछि ।
मिथिलाक एहि सपूत स इसमाद लेल धीरेन्द्र झा गप केने छथि । पेश अछि हुनकर गप-शप क किछु खापहिल मैथिली लिटरेसी फेस्टीवल मे आयोजक
एकटा सत्र ‘’मैथिली पोथीक बिक्री आ आवंटन’’ पर केने छथि । जाहि मे
डिस्कशन पैनल मे श्री भैरव लाल दास आ श्री शरदेन्दू चौधरी बैसल छल । ओहि मे
चर्चा भेल कि मैथिली मे पोथी त रास छपैत अछि मुदा बिकायत नहि अछि । लोग
चाहितो कीन नहि सकैत अछि । तखन दर्शक दीर्घा स हम पुछलों कि अहाँ सभ गप
एतेक करैत छी त एहन कोनो काज करैत किएक नहि छी ।
एहि
बात पर भैरव लाल दास जी हमरा खुब डॉटलथि रहय जे सभ गोटे एक दोसरा कए
अढ़ाबैत रहैत छी अपने किएक नहि खोलि लैत छी । ओहि दिन बात हमरा क्लीक कए
गेल आ सैप्पी मार्टक योजना पर काज शुरू भए गेल । एहि हम स्टार्टअप चारि
गोटे छी हम, विकाश झा, मुकुन्द मयंक आ गुंजन श्री शामिल छी । हम चारो मिल
कए सैप्पी मार्टक शुरूआत केलहूँ ।
मैथिली लेल पहिने सेहो एहि तरह क काज भेल छल मुदा फ्लॅाप भए गेल । तखनो एहि तरह क काज अहाँक डर नहि लागल ।
दिनकर
कए एकटा फैकरा अछि, ‘’मानव जब जोर लगाता है, पत्थर पानी बन जाता है’’ । आ
हिंदी अंग्रेजी मे जखन एतेक साइट छै आ नित रोज-रोज तरक्की कए रहल छथि त हम
किएक नहि ! बस एहि सोचि कए लागि गेलहूँ । पहिने इ साइट ब्लॉग क रूप मे छल आ
हम फोन पर ऑर्डर लैत छलहूँ । मुदा जब ऑर्डर बढ़ि गेल त एकरा विधिवत रूप स
वैबसाइट क रूप देबय पड़ल आ मर्चेन्ट स आर्डर बुक होबय लागल ।
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